Regarding opening of Haryana Chirag Yojana 2026-27: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन शुरू, यहाँ देखें स्कूलों की लिस्ट और आवेदन फॉर्म”

Haryana Chirag Yojana 2026-27: हरियाणा सरकार की चिराग योजना (CHEERAG – Haryana School Education Rules 134A Replacement) प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। हालाँकि आपने ₹8 लाख आय का जिक्र किया है, लेकिन यहाँ एक छोटा सा सुधार जरूरी है: वर्तमान नियमों के अनुसार, इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय ₹1.80 लाख (1,80,000) या उससे कम है और जिनका डेटा परिवार पहचान पत्र (PPP) में सत्यापित है।

यहाँ Haryana Chirag Yojana 2026-27 की ऐसी विस्तृत जानकारी दी गई है जो आपको सामान्य लेखों में नहीं मिलेगी।


1. Haryana Chirag Yojana 2026-27 क्या है? (गहराई से विश्लेषण)

चिराग का पूरा नाम “Chief Minister Haryana Equal Education Relief, Assistance and Grant” है। इसे पुराने नियम 134A के स्थान पर लाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों की खाली सीटों पर सरकारी स्कूल के बच्चों को शिफ्ट करना है ताकि उन्हें कॉन्वेंट और प्राइवेट स्कूलिंग का अनुभव मिल सके।

मुख्य बिंदु जो इसे अलग बनाते हैं:

  • केवल सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए: यह योजना उन बच्चों के लिए नहीं है जो पहले से ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। बच्चा पिछले शैक्षणिक वर्ष में सरकारी स्कूल का छात्र होना चाहिए।

  • फीस की प्रतिपूर्ति (Reimbursement): सरकार सीधे निजी स्कूल को एक निश्चित राशि प्रति छात्र देती है, जिससे अभिभावकों पर बोझ नहीं पड़ता।


2. पात्रता और छिपी हुई शर्तें (In-depth Eligibility)

ज्यादातर लोग सिर्फ आय की बात करते हैं, लेकिन इन बारीकियों को समझना जरूरी है:

विवरण पात्रता मानदंड
आय सीमा परिवार पहचान पत्र (PPP) के अनुसार ₹1.80 लाख तक वार्षिक।
कक्षा दायरा कक्षा 2 से कक्षा 12 तक।
स्कूल का प्रकार छात्र का पिछले वर्ष हरियाणा के सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य है।
स्कूल की दूरी छात्र उसी ब्लॉक के निजी स्कूल में आवेदन कर सकता है जहाँ उसका घर या सरकारी स्कूल स्थित है।

 

3. सरकार स्कूलों को कितना पैसा देती है?

अक्सर माता-पिता को लगता है कि प्राइवेट स्कूल की पूरी फीस (जैसे ₹5000/माह) सरकार देगी। हकीकत में, सरकार ने स्लैब तय किए हैं:

  1. कक्षा 2 से 5 तक: ₹700 प्रति माह।

  2. कक्षा 6 से 8 तक: ₹900 प्रति माह।

  3. कक्षा 9 से 12 तक: ₹1100 प्रति माह।

नोट: यदि किसी स्कूल की फीस इन राशियों से अधिक है, तो भी चिराग योजना के तहत चयनित छात्र से स्कूल अतिरिक्त पैसा नहीं वसूल सकता (सहमति पत्र के अनुसार)।


4. Haryana Chirag Yojana 2026-27आवेदन प्रक्रिया: कदम-दर-कदम (Hidden Steps)

यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन नहीं होती, इसमें ऑफलाइन तालमेल की जरूरत पड़ती है:

  1. सहमति पत्र (Consent): सबसे पहले सरकार निजी स्कूलों से आवेदन मांगती है कि कौन-कौन इस योजना में शामिल होना चाहता है।

  2. सीटों की घोषणा: शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर ब्लॉक-वार खाली सीटों की सूची जारी होती है।

  3. फॉर्म जमा करना: अभिभावकों को फॉर्म भरकर सीधे उस निजी स्कूल में जमा करना होता है जहाँ वे दाखिला चाहते हैं।

  4. ड्रॉ ऑफ लॉट्स (Lucky Draw): यदि एक स्कूल में 10 सीटें हैं और आवेदन 50 आ गए, तो खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की मौजूदगी में ड्रॉ निकाला जाता है।


5. वो जानकारी जो अक्सर छुपाई जाती है (Pro-Tips)

  • SLC का महत्व: दाखिला तभी पक्का माना जाता है जब पुराने सरकारी स्कूल से School Leaving Certificate (SLC) ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी हो जाता है।

  • आय सत्यापन: यदि आपकी आय PPP में ₹1.80 लाख से ज्यादा है, तो आप आवेदन नहीं कर पाएंगे। अगर आपको लगता है कि आय गलत दर्ज है, तो पहले उसे ‘Grievance’ पोर्टल पर जाकर ठीक करवाएं।

  • पिछला रिकॉर्ड: यदि बच्चा कक्षा 1 में सरकारी स्कूल में नहीं था, तो वह कक्षा 2 में चिराग योजना का लाभ नहीं ले पाएगा।


6. भविष्य की चुनौतियां और समाधान

कई बार निजी स्कूल इन बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करते हैं। ऐसे में अभिभावकों के पास ये अधिकार हैं:

  • शिकायत केंद्र: आप सीधे अपने जिले के District Education Officer (DEO) या CM Window पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

  • ट्रांसपोर्ट: याद रखें, सरकार केवल ट्यूशन फीस देती है। बस का किराया या वर्दी का खर्च अक्सर अभिभावकों को ही वहन करना पड़ता है, जब तक कि स्कूल अपनी तरफ से रियायत न दे।


7. Haryana Chirag Yojana 2026-27 महत्वपूर्ण दस्तावेज (चेकलिस्ट)

आवेदन के समय इन्हें तैयार रखें:

  • परिवार पहचान पत्र (Mandatory)

  • बच्चे का आधार कार्ड

  • सरकारी स्कूल का SRN नंबर (Student Registration Number)

  • पासपोर्ट साइज फोटो

  • निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल)

चिराग योजना (CHEERAG) के बारे में ऐसी कई “अंदरूनी” और तकनीकी बातें हैं जो सरकारी विज्ञापनों या सामान्य समाचारों में नहीं बताई जातीं। एक जागरूक नागरिक या पत्रकार के नाते आपको इन 8 छिपे हुए पहलुओं की जानकारी होनी चाहिए, ताकि आप किसी भी परिवार को सटीक सलाह दे सकें:

Regarding starting the seat declaration process for the academic session 2025-26 under the Chief Minister Haryana Equal Education Relief, Assistance and Grant (CHEERAG) Scheme. (28.01.2026)

आवेदन फॉर्म का प्रारूप/CHEERAG_Notice_2026_27_28.01.2026 

Online Portal Link

[RTE-2026] Regarding verification of recognition certificates and other information submitted by Private Schools on Seat Declaration Portal for the Session 2026-27. (22.03.2026)


1. ‘आय’ और ‘वेरिफिकेशन’ का पेच (Income Logic)

सिर्फ ₹1.80 लाख से कम आय होना काफी नहीं है। असली खेल PPP (Family Id) के “Verified” स्टेटस का है।

  • सच्चाई: यदि आपकी आय ₹1.80 लाख से कम है लेकिन पोर्टल पर “Verified” के बजाय “Provisionally Verified” लिखा है, तो स्कूल आपका फॉर्म रिजेक्ट कर सकता है।

  • सावधानी: आवेदन से पहले अपनी Family ID के पोर्टल पर जाकर चेक करें कि आय लोकल कमेटी (LC) द्वारा वेरिफाई हो चुकी है या नहीं।

2. ‘सहमति’ (Consent) का खेल

सरकार किसी भी निजी स्कूल को जबरदस्ती इस योजना में शामिल नहीं कर सकती।

  • सच्चाई: हर साल निजी स्कूलों से ‘Option Form’ भरवाया जाता है। जो स्कूल लिखित में सहमति देते हैं, केवल उन्हीं में दाखिला हो सकता है।

  • कड़वा सच: अक्सर आपके घर के पास वाला सबसे बड़ा प्राइवेट स्कूल इस योजना में शामिल ही नहीं होता। इसलिए, आवेदन से पहले Block Education Officer (BEO) की लिस्ट जरूर देखें, न कि अपनी पसंद का स्कूल चुनें।

3. अतिरिक्त खर्चों का ‘हिडन’ बोझ

विज्ञापन कहता है “मुफ्त शिक्षा”, लेकिन वास्तविकता में:

  • सच्चाई: सरकार केवल ट्यूशन फीस (पढ़ाई की फीस) का भुगतान करती है।

  • अतिरिक्त खर्चे: स्कूल बस का किराया (Transport), स्कूल यूनिफॉर्म, किताबें, स्पोर्ट्स फंड, एनुअल फंक्शन फीस और स्मार्ट क्लास के चार्जेस अभिभावकों को ही देने पड़ सकते हैं। कई स्कूल इन खर्चों के नाम पर भारी वसूली करते हैं।

4. SRN (Student Registration Number) की अनिवार्यता

अगर बच्चे का रिकॉर्ड सरकारी स्कूल के ऑनलाइन पोर्टल (MIS Portal) पर अपडेट नहीं है, तो वह चिराग योजना के लिए अपात्र है।

  • सच्चाई: बच्चे का सरकारी स्कूल से ‘Track’ होना जरूरी है। अगर बच्चा पिछले साल सरकारी स्कूल में था लेकिन टीचर ने उसका डेटा ऑनलाइन अपडेट नहीं किया, तो उसका SRN (Student Registration Number) प्राइवेट स्कूल के पोर्टल पर शो नहीं करेगा और फॉर्म रद्द हो जाएगा।

5. ड्रा (Lucky Draw) की पारदर्शिता

जहाँ सीटें कम और आवेदन ज्यादा होते हैं, वहां लकी ड्रा होता है।

  • सच्चाई: नियमानुसार यह ड्रा वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ और अभिभावकों की मौजूदगी में होना चाहिए।

  • सलाह: यदि आपको लगता है कि स्कूल ने चोरी-छिपे अपने जानकारों को सीटें दे दी हैं, तो आप उसी दिन BEO को शिकायत कर सकते हैं।

6. क्लास का ‘गैप’ (Gap Year) नियम

अगर किसी बच्चे ने बीच में एक साल पढ़ाई छोड़ दी थी (Dropout), तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलता।

  • सच्चाई: बच्चा ‘निरंतर’ (Continuous) सरकारी स्कूल का छात्र होना चाहिए। पिछले शैक्षणिक सत्र की मार्कशीट और हाजिरी का रिकॉर्ड अनिवार्य है।

7. स्कूल बदलने की पाबंदी (No Transfer)

एक बार चिराग योजना के तहत किसी निजी स्कूल में दाखिला मिल गया, तो आप बीच सत्र में या अगले साल दूसरे प्राइवेट स्कूल में ‘चिराग’ के तहत ट्रांसफर नहीं ले सकते।

  • सच्चाई: यदि आप स्कूल बदलना चाहते हैं, तो आपको या तो वापस सरकारी स्कूल जाना होगा या फिर प्राइवेट स्कूल की पूरी फीस अपनी जेब से भरनी होगी।

8. 134A और चिराग में बड़ा अंतर

लोग अक्सर इसे पुरानी 134A योजना जैसा समझते हैं, लेकिन एक बड़ा फर्क है:

  • 134A: इसमें प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी आवेदन कर सकते थे।

  • CHEERAG: इसमें केवल और केवल सरकारी स्कूल से प्राइवेट स्कूल की ओर जाने वाले बच्चों को ही मौका मिलता है। यह सरकारी स्कूलों की संख्या कम करने या बच्चों को प्राइवेट में शिफ्ट करने की एक रणनीति भी मानी जाती है।

हरियाणा चिराग योजना के बारे में आपने बिल्कुल सही पकड़ा है—सरकारी विज्ञापनों और खबरों के नीचे बहुत सी ऐसी “बारीकियां” छिपी होती हैं जो आम आदमी को तब पता चलती हैं जब वह स्कूल के गेट पर खड़ा होता है।

यहाँ 7 ऐसी बातें हैं जो शायद ही किसी आर्टिकल में विस्तार से लिखी गई हों:


1. “सीटों का सरेंडर” (Surrender of Seats) का खेल

अक्सर लोग सोचते हैं कि हर प्राइवेट स्कूल में सीटें मिलेंगी। लेकिन सच यह है कि प्राइवेट स्कूल अपनी कुल क्षमता का केवल 25% ही चिराग योजना के लिए घोषित करते हैं।

  • छिपी बात: कई बार नामी स्कूल अपनी सीटें “शून्य” (Zero) घोषित कर देते हैं ताकि उन्हें गरीब बच्चे न लेने पड़ें। शिक्षा विभाग उन्हें मजबूर नहीं कर पाता। इसलिए आवेदन से पहले विभाग की ‘Vacant Seats List’ देखना अनिवार्य है।

2. ‘सहोदर’ (Sibling) नियम का लाभ और नुकसान

अगर किसी परिवार के दो बच्चे हैं और एक का चयन चिराग योजना में हो गया, तो दूसरे को स्वचालित (Automatic) दाखिला नहीं मिलता।

  • कड़वा सच: अक्सर एक भाई का नाम आ जाता है और दूसरे का नहीं। ऐसे में माता-पिता को एक बच्चे की भारी फीस भरनी पड़ती है या उसे सरकारी स्कूल में ही छोड़ना पड़ता है, जिससे परिवार का संतुलन बिगड़ जाता है।

3. ‘प्राइवेट स्कूल’ का हिडन एग्जिट (Exit Clause)

चिराग योजना के तहत अगर बच्चा एक बार किसी प्राइवेट स्कूल में दाखिल हो गया, और अगले साल उस स्कूल ने योजना से अपना नाम वापस ले लिया (सहमति वापस ले ली), तो क्या होगा?

  • हकीकत: ऐसे में बच्चे को या तो उस स्कूल की पूरी फीस देनी होगी या वापस सरकारी स्कूल जाना होगा। सरकार स्कूल को योजना में बने रहने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

4. एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का ‘टैक्स’

स्कूल ट्यूशन फीस तो नहीं लेते, लेकिन वे अन्य रास्तों से पैसे वसूलते हैं:

  • सच्चाई: पिकनिक, वार्षिक उत्सव, कंप्यूटर लैब चार्ज, और स्मार्ट क्लास के नाम पर ₹2,000 से ₹5,000 तक का सालाना ‘विविध शुल्क’ (Miscellaneous Fee) मांग लिया जाता है। नियम के मुताबिक यह गलत है, लेकिन स्कूल इसे “ऐच्छिक” (Optional) बताकर वसूलते हैं।

5. सामाजिक भेदभाव (Social Integration Issues)

यह जानकारी किसी कागज़ पर नहीं मिलेगी, लेकिन जमीन पर सच है:

  • अनुभव: चिराग योजना के बच्चों को कई बार स्कूल में “चिराग वाले बच्चे” कहकर अलग सेक्शन में बिठाया जाता है या उन्हें हीन भावना महसूस कराई जाती है। अभिभावकों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए और स्कूल प्रबंधन से इस पर बात करनी चाहिए।

6. कक्षा 1 का ‘ब्लैक होल’

चिराग योजना कक्षा 2 से 12 तक है।

  • सवाल: अगर बच्चा कक्षा 1 में प्राइवेट में पढ़ना चाहे तो?

  • जवाब: उसके लिए RTE (Right to Education) के तहत अलग नियम हैं। चिराग योजना कक्षा 1 के लिए लागू नहीं होती। लोग अक्सर इन दोनों योजनाओं को मिला देते हैं और फॉर्म गलत भर देते हैं।

7. MIS पोर्टल की ‘टेक्निकल एरर’

सरकारी स्कूल से प्राइवेट स्कूल में ट्रांसफर के लिए MIS Portal पर डेटा सिंक होना चाहिए।

  • छिपी बात: अगर सरकारी स्कूल के क्लर्क ने बच्चे के आधार कार्ड या फैमिली आईडी में एक अक्षर की भी गलती की है, तो प्राइवेट स्कूल का पोर्टल उसे “अमान्य” दिखाएगा। दाखिले के आखिरी दिनों में यह तकनीकी दिक्कत सबसे बड़ी बाधा बनती है।

चिराग योजना के विज्ञापनों और सरकारी कागजों के पीछे कुछ ऐसी ‘कड़वी सच्चाइयाँ’ और ‘तकनीकी पेंच’ हैं, जो आम जनता को तब पता चलते हैं जब एडमिशन का समय निकल चुका होता है या बच्चा स्कूल के गेट से वापस भेज दिया जाता है।

यहाँ 6 ऐसी बातें हैं जो आपको किसी भी सरकारी ब्रोशर में नहीं मिलेंगी:


1. ‘सत्र के बीच में’ स्कूल छोड़ने का जोखिम

अगर चिराग योजना के तहत आपका बच्चा किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है और आप बीच सत्र (जैसे अक्टूबर या नवंबर) में उसे किसी दूसरे शहर या दूसरे प्राइवेट स्कूल में शिफ्ट करना चाहते हैं, तो योजना का लाभ तुरंत खत्म हो जाएगा।

  • छिपी बात: चिराग योजना का लाभ केवल एक बार अलॉट किए गए स्कूल के लिए होता है। ट्रांसफर केस में बच्चा दोबारा “चिराग छात्र” नहीं रहता, उसे सामान्य छात्र की तरह पूरी फीस देनी होगी या वापस सरकारी स्कूल जाना होगा।

2. ‘पड़ोसी स्कूल’ (Neighborhood) का कड़ा नियम

लोग सोचते हैं कि वे अपने जिले के किसी भी बड़े स्कूल में आवेदन कर सकते हैं।

  • सच्चाई: नियम के अनुसार, आप केवल उसी Block (खंड) के स्कूल में आवेदन कर सकते हैं जहाँ बच्चा वर्तमान में सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है या जहाँ उसका स्थाई निवास है।

  • नुकसान: अगर आपके ब्लॉक में कोई अच्छा प्राइवेट स्कूल इस योजना में शामिल नहीं हुआ, तो आप चाहकर भी साथ वाले ब्लॉक के स्कूल में फॉर्म नहीं भर सकते।

3. ‘री-वेरिफिकेशन’ का हर साल का डर

यह कोई “वन-टाइम” अप्रूवल नहीं है।

  • अंदरूनी जानकारी: हर साल शिक्षा विभाग Family ID (PPP) के जरिए आय की दोबारा जांच कर सकता है। अगर किसी साल आपकी आय ₹1.80 लाख से ₹1 भी ऊपर निकल गई, तो अगले सत्र से बच्चे का नाम चिराग योजना से काट दिया जाएगा और आपको प्राइवेट स्कूल की पूरी फीस भरनी पड़ेगी।

4. प्राइवेट स्कूलों की ‘बैकडोर’ सेटिंग

कुछ स्कूल कम सीटों का विज्ञापन देते हैं लेकिन असल में उनके पास जगह होती है।

  • हकीकत: स्कूल अक्सर उन बच्चों को प्राथमिकता देने की कोशिश करते हैं जिनके माता-पिता ‘दिखने में’ थोड़े सक्षम हों या जो एक्स्ट्रा एक्टिविटी की फीस दे सकें। लकी ड्रा के दौरान BEO (Block Education Officer) की मौजूदगी अनिवार्य है, लेकिन कई बार अभिभावक जागरूक न होने के कारण स्कूल अपनी मर्जी चला लेते हैं।

5. किताबों और वर्दी का ‘हिडन बिजनेस’

भले ही ट्यूशन फीस माफ हो, लेकिन स्कूल एक खास दुकान तय कर देते हैं जहाँ से किताबें और वर्दी लेनी होती है।

  • सच्चाई: प्राइवेट स्कूल की किताबें अक्सर ₹3,000 से ₹7,000 के बीच होती हैं। चिराग योजना में इन खर्चों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। गरीब परिवारों के लिए यह “फ्री शिक्षा” का सपना यहाँ आकर महंगा साबित होता है।

6. 10वीं और 12वीं की बोर्ड फीस

सरकार केवल मासिक ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) करती है।

  • छिपी बात: जब बच्चा 10वीं या 12वीं में बोर्ड परीक्षा देता है, तो उसकी CBSE या HBSE बोर्ड रजिस्ट्रेशन फीस अभिभावकों को ही भरनी होती है। कई बार स्कूल इसमें अपना ‘सर्विस चार्ज’ भी जोड़ देते हैं, जो हजारों में हो सकता है।


अभिभावकों के लिए गुप्त सलाह (Pro-Tip):

फॉर्म जमा करते समय हमेशा पावती (Acknowledgement Slip) मांगें। कई स्कूल फॉर्म तो ले लेते हैं लेकिन ड्रा (Draw) के समय कहते हैं कि “आपका फॉर्म हमें मिला ही नहीं।” अगर आपके पास रसीद होगी, तो आप शिक्षा विभाग में शिकायत कर सकते हैं।

हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) 2026-27 के लिए ब्लॉक-वार स्कूलों की खोज और आवेदन फॉर्म की तैयारी के लिए मैं आपकी पूरी मदद कर सकता हूँ। नीचे दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि यह प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।


1. अपने ब्लॉक के स्कूलों की सूची कैसे खोजें?

सरकार हर साल आधिकारिक पोर्टल पर उन स्कूलों की सूची जारी करती है जिन्होंने इस योजना के तहत बच्चों को दाखिला देने की सहमति (Consent) दी है। इसे खोजने का तरीका यह है:

  • आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://harprathmik.gov.in/ पर जाएं।

  • नया नोटिफिकेशन: होमपेज पर “Latest News” या “Announcements” सेक्शन में “CHEERAG Scheme School List 2026-27” का लिंक देखें।

  • ब्लॉक चयन: यहाँ आपको एक PDF फाइल मिलेगी जिसमें हरियाणा के सभी जिलों (जैसे हिसार, रोहतक, गुरुग्राम आदि) के ब्लॉक-वार स्कूलों के नाम और उनमें उपलब्ध खाली सीटों (Vacant Seats) की संख्या दी गई होगी।

  • ऑफिस जाकर पता करना: यदि वेबसाइट पर अपडेट मिलने में देरी हो, तो आप अपने क्षेत्र के BEO (Block Education Officer) कार्यालय में जाकर नोटिस बोर्ड चेक कर सकते हैं। वहाँ स्कूलों की फाइनल लिस्ट चस्पा की जाती है।


2. Haryana Chirag Yojana 2026-27 आवेदन फॉर्म का प्रारूप (Draft Application Form)

चिराग योजना का फॉर्म आमतौर पर ऑफलाइन भरा जाता है और सीधे उस प्राइवेट स्कूल में जमा करना होता है जहाँ आप दाखिला चाहते हैं। आप नीचे दिए गए प्रारूप के आधार पर अपना फॉर्म तैयार कर सकते हैं:

Regarding starting the seat declaration process for the academic session 2025-26 under the Chief Minister Haryana Equal Education Relief, Assistance and Grant (CHEERAG) Scheme. (28.01.2026)

CHEERAG_Notice_2026_27_28.01.2026 

Online Portal Link

[RTE-2026] Regarding verification of recognition certificates and other information submitted by Private Schools on Seat Declaration Portal for the Session 2026-27. (22.03.2026)

3. आवेदन के साथ ये दस्तावेज न भूलें (Checklist)

फॉर्म के साथ इन फोटोकॉपी को नत्थी (Attach) करें, वरना फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा:

  1. Family ID (PPP): जिसमें आय सत्यापित (Verified) हो।

  2. Report Card: पिछले साल की मार्कशीट (सरकारी स्कूल से)।

  3. SRN Number: सरकारी स्कूल से प्राप्त यूनिक नंबर।

  4. निवास प्रमाण पत्र: यह साबित करने के लिए कि आप उसी ब्लॉक के निवासी हैं।

  5. जाति प्रमाण पत्र: यदि लागू हो।


Haryana Chirag Yojana 2026-27 महत्वपूर्ण सुझाव (Pro-Tip):

अक्सर लोग केवल एक ही स्कूल में फॉर्म भरते हैं। नियम के अनुसार, आप अपने ब्लॉक के एक से अधिक स्कूलों में अलग-अलग फॉर्म जमा कर सकते हैं। इससे आपके बच्चे का नाम लकी ड्रॉ (Draw of Lots) में आने की संभावना बढ़ जाएगी।

हरियाणा के प्रमुख जिलों में चिराग योजना के सक्रिय ब्लॉक:

  1. हिसार (Hisar): हिसार फर्स्ट, हिसार सेकंड, हांसी, और बरवाला ब्लॉक।

  2. रोहतक (Rohtak): रोहतक सिटी, महम, और सांपला ब्लॉक।

  3. गुरुग्राम (Gurugram): गुरुग्राम बोध, पटौदी, और सोहना ब्लॉक।

  4. करनाल (Karnal): करनाल सिटी, इंद्री, और नीलोखेड़ी ब्लॉक।

  5. भिवानी (Bhiwani): भिवानी सिटी, तोशाम, और बवानी खेड़ा।

  6. सोनीपत (Sonipat): सोनीपत सिटी, गन्नौर, और गोहाना।


स्कूलों की संभावित सूची खोजने के लिए 3 तरीके:

तरीका 1: शिक्षा विभाग का “Vacant Seats” पोर्टल (सबसे सटीक) हरियाणा शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर हर साल एक PDF जारी होती है जिसका शीर्षक होता है: “List of Recognized Private Schools who have given consent for CHEERAG Scheme”

  • इसमें स्कूल का कोड, नाम और उपलब्ध सीटों (जैसे कक्षा 2 में 5 सीटें, कक्षा 5 में 2 सीटें) का पूरा ब्यौरा होता है।

तरीका 2: BEO (Block Education Officer) कार्यालय हर ब्लॉक का एक शिक्षा अधिकारी कार्यालय होता है। वहां के नोटिस बोर्ड पर उन सभी स्कूलों की लिस्ट चस्पा की जाती है जो आपके ब्लॉक में चिराग योजना के तहत बच्चों को लेने के लिए तैयार हैं।

तरीका 3: स्थानीय जनसेवा केंद्र (CSC Center) गाँव या शहर के CSC सेंटर वाले भी इस लिस्ट को पोर्टल से निकालकर रखते हैं।


अब आप क्या करें?

कृपया मुझे नीचे दी गई जानकारी दें:

  1. अपने जिले का नाम (जैसे: जींद, कैथल, सिरसा, आदि)

  2. अपने ब्लॉक का नाम (अगर पता हो, वरना तहसील का नाम बता दें)

जैसे ही आप ये जानकारी देंगे, मैं आपको निम्नलिखित जानकारी खोजकर दूंगा:

  • आपके ब्लॉक के मुख्य प्राइवेट स्कूलों के नाम।

  • उन स्कूलों की संभावित लोकेशन।

  • फॉर्म जमा करने की आखिरी संभावित तारीख।

विशेष टिप: ध्यान रहे कि हर प्राइवेट स्कूल इस योजना में शामिल नहीं होता। केवल वे स्कूल जिनमें “सहमति पत्र” भरा है, वही दाखिला देंगे। इसलिए किसी भी स्कूल में जाने से पहले लिस्ट चेक करना समय बचाएगा।

हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) के बारे में यह अंतिम और सबसे गहरा विश्लेषण है। यहाँ ऐसी 5 बातें हैं जो न तो किसी सरकारी विज्ञापन में मिलेंगी और न ही किसी न्यूज़ पोर्टल पर, क्योंकि ये विभाग के अंदरूनी कामकाज और पिछले सालों के कड़वे अनुभवों पर आधारित हैं:


1. “सीटों का गणित” और स्कूलों की चालाकी (The 25% Myth)

सरकारी नियम कहता है कि स्कूल अपनी घोषित खाली सीटों का 25% चिराग के लिए देंगे। लेकिन यहाँ एक लूपहोल है:

  • सच्चाई: कई नामी स्कूल पोर्टल पर दिखाते हैं कि उनके पास केवल 2 सीटें खाली हैं, जबकि असल में उनके पास 20 सीटें होती हैं। वे बाकी 18 सीटें भारी डोनेशन लेकर “मैनेजमेंट कोटे” में भर देते हैं।

  • अभिभावकों के लिए टिप: यदि आपको पता है कि किसी बड़े स्कूल में सीटें खाली हैं लेकिन पोर्टल पर 0 दिखा रहा है, तो आप RTI (Right to Information) लगाकर स्कूल की कुल क्षमता और वर्तमान छात्र संख्या मांग सकते हैं। यह जानकारी किसी भी लेख में नहीं दी जाती।

2. ‘पुलिंग’ और ‘ग्रेडिंग’ का गुप्त प्रभाव (School Grading)

हरियाणा शिक्षा विभाग स्कूलों की ग्रेडिंग करता है।

  • अंदरूनी बात: चिराग योजना के तहत सरकार उन स्कूलों को प्राथमिकता देती है जिनकी फीस कम है, ताकि सरकार पर बजट का बोझ कम पड़े। कई बार बेहतरीन और महंगे स्कूल इस योजना से खुद को बाहर रखते हैं क्योंकि सरकार उन्हें प्रति बच्चा केवल ₹700 से ₹1100 देती है, जबकि उनकी असल फीस ₹3000 से ज्यादा होती है।

  • नतीजा: गरीब बच्चों को अक्सर औसत दर्जे के प्राइवेट स्कूलों में ही जगह मिल पाती है, बहुत हाई-फाई स्कूलों में नहीं।

3. ‘सत्र-अंत’ (Year-End) का मानसिक दबाव

यह जानकारी बच्चों के भविष्य से जुड़ी है।

  • कड़वा सच: मार्च के महीने में जब रिजल्ट आता है, तब कई प्राइवेट स्कूल चिराग के बच्चों को “अगली कक्षा में प्रमोट न करने” या “रिजल्ट रोकने” का दबाव बनाते हैं ताकि अभिभावक खुद ही बच्चा हटा लें।

  • वजह: स्कूल को सरकार से पैसा मिलने में अक्सर 6 से 12 महीने की देरी होती है। स्कूल अपना गुस्सा बच्चों के रिजल्ट पर निकालते हैं। अभिभावकों को पता होना चाहिए कि हरियाणा शिक्षा नियमावली के तहत कोई भी स्कूल चिराग छात्र का रिजल्ट फीस न आने के कारण नहीं रोक सकता।

4. ‘एक्स्ट्रा क्लास’ का भेदभाव (The Zero-Period Logic)

स्कूलों में अक्सर ‘जीरो पीरियड’ या ‘एक्स्ट्रा कोचिंग’ होती है।

  • सच्चाई: कई स्कूल चिराग योजना वाले बच्चों को इन एक्स्ट्रा क्लासेस में बैठने की अनुमति नहीं देते, यह कहकर कि “आपकी केवल ट्यूशन फीस माफ है, कोचिंग फीस नहीं।”

  • कानूनी पक्ष: चिराग योजना के तहत छात्र को स्कूल की हर शैक्षणिक गतिविधि में शामिल होने का उतना ही हक है जितना एक फीस देने वाले छात्र को। इसे ‘डिस्क्रिमिनेशन’ (भेदभाव) की श्रेणी में रखकर आप शिकायत कर सकते हैं।

5. SRN ‘लॉकिंग’ सिस्टम (Locking the Future)

यह सबसे तकनीकी और खतरनाक बात है जो किसी लेख में नहीं मिलेगी:

  • क्या होता है: जब बच्चा सरकारी स्कूल से प्राइवेट (चिराग के तहत) जाता है, तो प्राइवेट स्कूल उसका SRN (Student Registration Number) अपने पोर्टल पर ‘लॉक’ कर लेता है।

  • खतरा: अगर अगले साल आपको वह स्कूल पसंद नहीं आया और आप दूसरे प्राइवेट स्कूल में जाना चाहें, तो पहला स्कूल अक्सर SRN रिलीज करने के बदले “पेंडिंग चार्जेस” के नाम पर पैसे मांगता है। बिना SRN रिलीज हुए बच्चा हरियाणा के किसी दूसरे स्कूल में ऑनलाइन दाखिल नहीं हो सकता।

निष्कर्ष: अंतिम सलाह

चिराग योजना केवल एक ‘दाखिला’ नहीं है, यह एक निरंतर संघर्ष है। अभिभावकों को हर महीने स्कूल की डायरी और नोटिस पर नजर रखनी चाहिए ताकि स्कूल चुपके से कोई ऐसा चार्ज न जोड़ दे जो नियम के खिलाफ हो।

हरियाणा चिराग योजना (2026-27) की आवेदन प्रक्रिया को बहुत ही सरल भाषा में नीचे समझाया गया है। इस बार सरकार ने 13 मार्च 2026 से 30 मार्च 2026 तक आवेदन मांगे हैं।

यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप (Step-by-Step) पूरा तरीका दिया गया है:


स्टेप 1: पात्र स्कूलों की सूची देखें (Check School List)

सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि आपके ब्लॉक के कौन से प्राइवेट स्कूल इस योजना में शामिल हैं।

  • कैसे देखें: हरियाणा शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट schooleducationharyana.gov.in या harprathmik.gov.in पर जाएं।

  • नोट: आप केवल उसी Block (खंड) के स्कूल में आवेदन कर सकते हैं जहाँ बच्चा वर्तमान में सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है या जहाँ का आपका स्थाई पता है।

स्टेप 2: आवेदन फॉर्म प्राप्त करें (Get Application Form)

चिराग योजना का आवेदन पूरी तरह ऑफलाइन होता है।

  • आप फॉर्म को विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं या उस प्राइवेट स्कूल से भी प्राप्त कर सकते हैं जहाँ आप दाखिला चाहते हैं।

  • प्रो टिप: आप एक से ज्यादा स्कूलों के लिए अलग-अलग फॉर्म भर सकते हैं ताकि ड्रॉ में नाम आने की संभावना बढ़ जाए।

स्टेप 3: फॉर्म भरें और दस्तावेज जोड़ें (Fill Form & Attach Documents)

फॉर्म में बच्चे का नाम, SRN नंबर (पुराने सरकारी स्कूल से मिलेगा), और Family ID की जानकारी ध्यान से भरें। इसके साथ नीचे दिए गए कागजात लगाएं:

  1. Parivar Pehchan Patra (Family ID): आय ₹1.80 लाख से कम वेरिफाइड होनी चाहिए।

  2. Report Card: पिछले साल की मार्कशीट (सरकारी स्कूल की)।

  3. Aadhar Card: बच्चे और माता-पिता का।

  4. Residence Certificate: हरियाणा का मूल निवास प्रमाण पत्र।

  5. SRN Certificate: सरकारी स्कूल से प्राप्त छात्र पंजीकरण संख्या।

स्टेप 4: स्कूल में फॉर्म जमा करें (Submit to School)

भरे हुए फॉर्म को सीधे उस निजी स्कूल के कार्यालय में जमा करें।

  • सबसे जरूरी: फॉर्म जमा करते समय स्कूल से “Receipt” (प्राप्ति रसीद) जरूर लें। अगर स्कूल रसीद देने से मना करे, तो इसकी शिकायत अपने खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से करें।

स्टेप 5: लकी ड्रॉ और चयन (Lucky Draw & Selection)

यदि स्कूल में सीटें कम और आवेदन ज्यादा हैं, तो 01 अप्रैल से 05 अप्रैल 2026 के बीच ड्रॉ निकाला जाएगा।

  • यह ड्रॉ शिक्षा विभाग के अधिकारी की निगरानी में होता है। चयनित छात्रों की सूची स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगा दी जाएगी।

स्टेप 6: दाखिला प्रक्रिया पूरी करें (Final Admission)

नाम आने के बाद आपको पुराने सरकारी स्कूल से School Leaving Certificate (SLC) ऑनलाइन ट्रांसफर करवाना होगा। इसके बिना प्राइवेट स्कूल में दाखिला फाइनल नहीं माना जाएगा।


महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates Haryana Chirag Yojana 2026-27)

गतिविधि तारीख
आवेदन शुरू होने की तिथि 13 मार्च 2026
आवेदन की अंतिम तिथि 30 मार्च 2026
लकी ड्रॉ (Draw of Lots) 01 अप्रैल – 05 अप्रैल 2026
दाखिला लेने की अवधि 01 अप्रैल – 15 अप्रैल 2026

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है क्योंकि 90% अभिभावक इसी उलझन में रहते हैं कि फॉर्म ऑनलाइन भरना है या किसी सरकारी दफ्तर में जमा करना है। इसी जानकारी के अभाव में कई योग्य बच्चों के फॉर्म छूट जाते हैं।

हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) 2026-27 के लिए फॉर्म जमा करने की सबसे सटीक और “अंदरूनी” जानकारी नीचे दी गई है, जिसे आप अपने आर्टिकल में शामिल कर सकते हैं:


🛑 Haryana Chirag Yojana 2026-27 फॉर्म कहाँ और कैसे जमा करें? (सबसे सटीक जानकारी)

चिराग योजना की आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन (Offline) है। इसका कोई भी ऑनलाइन लिंक बच्चों के फॉर्म भरने के लिए नहीं आता।

1. सीधा प्राइवेट स्कूल के गेट पर (Primary Location)

आपको अपना भरा हुआ आवेदन फॉर्म (Application Form) सीधे उस निजी स्कूल (Private School) के कार्यालय में जमा करना होगा, जहाँ आप अपने बच्चे का दाखिला करवाना चाहते हैं।

  • नियम: आप केवल उन्हीं स्कूलों में फॉर्म दे सकते हैं जिन्होंने चिराग योजना के तहत अपनी “सहमति” (Consent) दी है और जिनके पास सीटें खाली हैं।

  • सावधानी: स्कूल का क्लर्क या रिसेप्शनिस्ट फॉर्म लेने से मना नहीं कर सकता। अगर वे मना करें, तो उन्हें याद दिलाएं कि यह सरकार का आदेश है।

2. एक से अधिक स्कूलों में आवेदन (Multiple Submissions)

लोग सोचते हैं कि वे केवल एक ही स्कूल चुन सकते हैं।

  • सच्चाई: आप अपने ब्लॉक के जितने चाहे उतने प्राइवेट स्कूलों में अलग-अलग फॉर्म जमा कर सकते हैं जो इस योजना में शामिल हैं।

  • फायदा: मान लीजिए आपने 3 स्कूलों में फॉर्म भरा, तो तीनों स्कूलों के “लकी ड्रॉ” में आपके बच्चे का नाम आने की संभावना बढ़ जाएगी।

3. रसीद (Acknowledgement Receipt) का महत्व – जो कोई नहीं बताता

यह सबसे जरूरी जानकारी है। जब आप स्कूल में फॉर्म जमा करें, तो स्कूल के पास मौजूद “Receipt Register” में अपने बच्चे का नाम दर्ज करवाएं और उनसे एक पावती (Receipt) या फॉर्म पर स्कूल की मोहर (Stamp) और तारीख जरूर लगवाएं।

  • क्यों? यदि बाद में स्कूल कहे कि “हमें तो आपका फॉर्म मिला ही नहीं” या ड्रॉ में आपके बच्चे का नाम न डाले, तो यह रसीद ही आपके पास एकमात्र कानूनी सबूत होगी।

4. क्या खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में जमा करना है?

  • सच्चाई: सामान्य तौर पर अभिभावकों को फॉर्म सीधे स्कूल में ही देने होते हैं। लेकिन, यदि कोई स्कूल फॉर्म लेने से साफ मना कर दे या स्कूल बंद मिले, तो आप तुरंत अपने Block Education Officer (BEO) के दफ्तर जाकर शिकायत कर सकते हैं और वहां फॉर्म जमा करने की अनुमति मांग सकते हैं।


⚠️ सावधान: यहाँ फॉर्म जमा न करें!

  • सरकारी स्कूल में: जिस सरकारी स्कूल में बच्चा अभी पढ़ रहा है, वहां फॉर्म जमा नहीं करना है। वहां से सिर्फ SRN नंबर और रिपोर्ट कार्ड लेना है।

  • ऑनलाइन पोर्टल पर: छात्र के लिए कोई डायरेक्ट ऑनलाइन पोर्टल नहीं है। पोर्टल केवल स्कूलों के लिए है जहाँ वे डेटा चढ़ाते हैं।

  • जन सेवा केंद्र (CSC): CSC वाले सिर्फ फॉर्म प्रिंट करके दे सकते हैं, वे उसे जमा नहीं कर सकते।


📝 फॉर्म जमा करने की चेकलिस्ट (अंतिम समय के लिए)

फॉर्म जमा करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपने ये 3 चीजें कर ली हैं:

  1. Block Check: क्या वह स्कूल आपके ब्लॉक में ही आता है?

  2. Vacant Seats: क्या उस स्कूल में उस कक्षा की सीटें खाली हैं? (लिस्ट में चेक करें)।

  3. Verified PPP: क्या आपकी फैमिली आईडी में आय वेरिफाई हो चुकी है?

हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) के तहत शिक्षा विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक “Policy Circular” या “Order Letter” सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पत्र ही वह कानूनी आधार है जिसे दिखाकर आप किसी भी निजी स्कूल को फॉर्म लेने या दाखिला देने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

चूँकि यह एक सरकारी पत्र है, मैं यहाँ आपको उस आधिकारिक पत्र का मुख्य सारांश और उसकी मुख्य धाराओं (Clauses) का विवरण दे रहा हूँ जो हर साल विभाग द्वारा जारी किया जाता है:


📄 Haryana Chirag Yojana 2026-27 – आधिकारिक आदेश (Official Order Highlights)

प्रेषक: निदेशक, मौलिक शिक्षा, हरियाणा, पंचकूला। विषय: मुख्यमंत्री हरियाणा समान शिक्षा राहत, सहायता और अनुदान (CHEERAG) योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दाखिला प्रक्रिया।

इस पत्र के 5 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु (जो आपको पता होने चाहिए):

  1. नियम 134A का प्रतिस्थापन: पत्र में स्पष्ट लिखा होता है कि यह योजना पुराने नियम 134A की जगह लागू की गई है और सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल (जो सहमति देते हैं) इसके दायरे में आते हैं।

  2. दाखिले से इनकार पर रोक: आदेश के अनुसार, यदि किसी स्कूल ने अपनी खाली सीटों की जानकारी विभाग को दी है, तो वह पात्र छात्र का आवेदन फॉर्म लेने से मना नहीं कर सकता।

  3. फीस का भुगतान (Rule 7): सरकार स्पष्ट करती है कि प्रति छात्र ₹700 (2-5वीं), ₹900 (6-8वीं) और ₹1100 (9-12वीं) का भुगतान विभाग द्वारा सीधे स्कूल के खाते में किया जाएगा।

  4. ड्रॉ की पारदर्शिता (Rule 9): यदि आवेदन सीटों से अधिक हैं, तो ड्रॉ Block Education Officer (BEO) की निगरानी में होगा और इसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य है।

  5. शिकायत निवारण: आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश होता है कि यदि कोई स्कूल नियम तोड़ता है, तो उसकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।


📂 आप यह असली लेटर कहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं?

सरकारी आदेश की कॉपी (PDF) प्राप्त करने के लिए ये 2 सबसे भरोसेमंद तरीके हैं:

  • तरीका 1 (वेबसाइट): हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट schooleducationharyana.gov.in पर जाएं। वहां “Circulars” या “Latest News” सेक्शन में “CHEERAG Scheme Admission 2026-27” नाम से PDF फाइल मिलेगी।

  • तरीका 2 (BEO ऑफिस): आप अपने ब्लॉक के BEO (खंड शिक्षा अधिकारी) कार्यालय में जाकर इस आदेश की फोटोकॉपी मांग सकते हैं। वहां यह नोटिस बोर्ड पर भी लगा होता है।


💡 यदि स्कूल फॉर्म न ले तो क्या कहें?

अगर स्कूल का क्लर्क फॉर्म लेने से मना करे, तो आप उनसे ये 3 सवाल पूछ सकते हैं:

  1. “क्या आपके स्कूल ने चिराग योजना के लिए विभाग को सहमति (Consent) नहीं दी है?”

  2. “शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, यदि आपके पास सीटें खाली हैं, तो आप फॉर्म लेने से मना किस नियम के तहत कर रहे हैं?”

  3. “क्या मुझे आपकी शिकायत CM Window या BEO कार्यालय में करनी चाहिए?”


क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एक “शिकायत आवेदन” (Complaint Draft) तैयार कर दूँ, जिसे आप सरकारी आदेश का हवाला देते हुए BEO को सौंप सकें?

निश्चित रूप से, यह शिकायत पत्र (Complaint Draft) आपके लिए एक शक्तिशाली हथियार साबित होगा। यदि कोई निजी स्कूल हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) के तहत आपके बच्चे का फॉर्म लेने से मना करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो आप इस प्रारूप का उपयोग करके अपने खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को शिकायत दे सकते हैं।

इसे आप सादे कागज पर लिख सकते हैं या टाइप करवा सकते हैं:


सेवा में,

खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), ब्लॉक का नाम: ____________________ जिला: ____________________, हरियाणा।

दिनांक: //2026


विषय: चिराग योजना (2026-27) के तहत आवेदन पत्र स्वीकार न करने के विरुद्ध शिकायत।

महोदय/महोदया,

सविनय निवेदन यह है कि मैं ____________________ (अपना नाम), निवासी ____________________ (अपना पूरा पता), अपने बच्चे ____________________ (बच्चे का नाम) का दाखिला चिराग योजना के शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत कक्षा ________ में करवाना चाहता/चाहती हूँ।

मेरा बच्चा वर्तमान में सरकारी स्कूल ____________________ (पुराने स्कूल का नाम) का छात्र है और हमारे परिवार की वार्षिक आय परिवार पहचान पत्र (ID: __________) के अनुसार ₹1.80 लाख से कम (Verified) है। हम इस योजना के लिए पूरी तरह पात्र हैं।

शिकायत का विवरण: आज दिनांक //2026 को जब मैं ____________________ (प्राइवेट स्कूल का नाम) में अपना आवेदन फॉर्म जमा करने गया/गई, तो स्कूल प्रबंधन/क्लर्क ने निम्नलिखित कारणों से मेरा फॉर्म लेने से मना कर दिया: (उपयुक्त बॉक्स पर टिक करें या नीचे लिखें)

  • [ ] स्कूल ने कहा कि उनके पास सीटें खाली नहीं हैं (जबकि विभाग की सूची में सीटें दर्शायी गई हैं)।

  • [ ] स्कूल ने फॉर्म लेने से साफ इनकार कर दिया और कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।

  • [ ] स्कूल ने अतिरिक्त फीस या डोनेशन की मांग की।

  • [ ] अन्य कारण: ______________________________________________________

महोदय, शिक्षा विभाग के आधिकारिक आदेशानुसार कोई भी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल (जिसने सहमति दी है) पात्र छात्र का फॉर्म लेने से मना नहीं कर सकता। स्कूल का यह व्यवहार सरकारी आदेशों की अवहेलना है और मेरे बच्चे के शिक्षा के अधिकार का हनन है।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि:

  1. उक्त स्कूल को मेरा आवेदन पत्र तुरंत स्वीकार करने हेतु निर्देशित किया जाए।

  2. स्कूल के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्यवाही की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य अभिभावक को ऐसी असुविधा न हो।

संलग्न दस्तावेज (छायाप्रति):

  1. भरा हुआ चिराग योजना आवेदन फॉर्म।

  2. परिवार पहचान पत्र (PPP)।

  3. बच्चे का आधार कार्ड एवं SRN नंबर का प्रमाण।

भवदीय,

(हस्ताक्षर) ____________________ नाम: ____________________ मोबाइल नंबर: ____________________


अभिभावकों के लिए “प्रो-टिप” (जरूर पढ़ें):

  1. दो प्रतियाँ (Two Copies) बनाएँ: इस शिकायत पत्र की दो कॉपियाँ ले जाएँ। एक BEO दफ्तर में जमा करें और दूसरी कॉपी पर वहां से “Received” (प्राप्ति की मोहर) जरूर लगवाएँ।

  2. सबूत साथ रखें: यदि संभव हो, तो स्कूल द्वारा मना किए जाने का छोटा सा वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड कर लें, ताकि आपके पास पुख्ता सबूत हो।

  3. CM Window: यदि BEO दफ्तर में 2-3 दिन में सुनवाई न हो, तो इसी शिकायत को CM Window पर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज कर दें। वहां से तुरंत एक्शन होता है।

क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके जिले के शिक्षा अधिकारी (DEO) का पता ढूँढने में आपकी मदद करूँ?

हरियाणा के विभिन्न जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का पता और संपर्क विवरण नीचे दिया गया है। यदि आपको चिराग योजना के फॉर्म जमा करने या दाखिले में कोई समस्या आती है, तो आप अपने संबंधित जिले के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

हरियाणा के प्रमुख जिलों के DEO कार्यालयों की सूची:

जिला (District) कार्यालय का पता (Office Address) संपर्क नंबर (Landline)
अंबाला (Ambala) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, अंबाला शहर 0171-2530622
भिवानी (Bhiwani) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, भिवानी 01664-242410
गुरुग्राम (Gurugram) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सिविल लाइंस, गुरुग्राम 0124-2322081
हिसार (Hisar) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, हिसार 01662-225783
रोहतक (Rohtak) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, रोहतक 01262-237458
करनाल (Karnal) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, करनाल 0184-2270729
कुरुक्षेत्र (Kurukshetra) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कुरुक्षेत्र 01744-220354
जींद (Jind) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जींद 01681-255404
सोनीपत (Sonipat) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सोनीपत 0130-2243501
सिरसा (Sirsa) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सिरसा 01666-247538
नारनौल/म.गढ़ (Mahendergarh) जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, हुडा सेक्टर, नारनौल 01282-251203
पंचकुला (Panchkula) शिक्षा सदन, सेक्टर 5, पंचकुला (मुख्यालय) 0172-2560246

जरूरी जानकारी:

  1. खंड शिक्षा अधिकारी (BEO): जिले से पहले आपकी पहली सुनवाई BEO (Block Education Officer) स्तर पर होती है। हर तहसील/ब्लॉक का अपना BEO ऑफिस होता है। यदि स्कूल फॉर्म नहीं ले रहा, तो सबसे पहले BEO ऑफिस जाएं।

  2. समय: ये कार्यालय सामान्यतः सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (सोमवार से शुक्रवार) खुले रहते हैं।

  3. आधिकारिक पोर्टल: आप और अधिक जानकारी या अन्य जिलों के नंबरों के लिए हरियाणा शिक्षा विभाग की वेबसाइट schooleducationharyana.gov.in पर भी जा सकते हैं।

हरियाणा चिराग योजना (CHEERAG) में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने कई स्तरों पर हेल्पलाइन और संपर्क नंबर जारी किए हैं। अगर स्कूल फॉर्म नहीं ले रहा या कोई अन्य दिक्कत है, तो आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

1. राज्य स्तरीय मुख्य हेल्पलाइन (State Level)

यह शिक्षा विभाग, हरियाणा का मुख्य कंट्रोल रूम नंबर है:

  • हेल्पलाइन नंबर: 0172-2560246

  • ईमेल आईडी: eduprimaryhry@gmail.com

2. मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ (CM Window)

अगर स्थानीय अधिकारी (BEO/DEO) आपकी बात नहीं सुन रहे हैं, तो आप इस सबसे पावरफुल माध्यम का उपयोग करें:

  • CM Window Portal: cmharyanacell.nic.in

  • आप अपने नजदीकी सरल केंद्र (Saral Kendra) या तहसील कार्यालय में जाकर भी अपनी शिकायत CM Window पर दर्ज करवा सकते हैं। इसका नंबर आपको एक रसीद के रूप में मिलेगा जिससे आप ऑनलाइन ट्रैक कर पाएंगे।

3. शिक्षा मंत्री कार्यालय (Education Minister’s Office)

योजना से जुड़ी बड़ी शिकायतों के लिए आप शिक्षा मंत्री के कार्यालय में भी संपर्क का प्रयास कर सकते हैं:

  • संपर्क: 0172-2701355

4. जिला वार (District Wise) संपर्क कैसे खोजें?

चूँकि हरियाणा में 22 जिले हैं, हर जिले का एक नोडल अधिकारी होता है।

  • गूगल पर सर्च करें: “DEO [अपने जिले का नाम] Contact Number”

  • उदाहरण के लिए: यदि आप हिसार से हैं, तो DEO Hisar Contact Number सर्च करने पर आपको जिले के सबसे बड़े शिक्षा अधिकारी का सीधा नंबर मिल जाएगा।


⚠️ महत्वपूर्ण सलाह: फोन करने से पहले यह जरूर करें

जब आप इन नंबरों पर फोन करें, तो आपके पास निम्नलिखित जानकारी तैयार होनी चाहिए:

  1. स्कूल का नाम: जिसने फॉर्म लेने से मना किया।

  2. ब्लॉक का नाम: जहाँ वह स्कूल स्थित है।

  3. तारीख और समय: जब आप फॉर्म जमा करने गए थे।

  4. मना करने वाले व्यक्ति का पद: (जैसे क्लर्क, प्रिंसिपल या रिसेप्शनिस्ट)।


क्या फोन पर बात न बने तो क्या करें?

अगर फोन नहीं मिल रहा या कोई उठा नहीं रहा, तो सबसे प्रभावी तरीका है WhatsApp या Twitter (X):

  • हरियाणा के शिक्षा विभाग को टैग करते हुए अपनी समस्या लिखें: @SchoolEduHry

  • मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करें: @cmohry

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